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शिक्षा संस्कृति उद्यान न्यास के स्थापना दिवस पर “भारत में शिक्षा एवं शिक्षा में भारतीयता” विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी 6 जुलाई को

नवागढ़/चांपा । शिक्षा संस्कृति उद्यान न्यास के स्थापना दिवस के पावन अवसर पर 6 जुलाई 2026 (सोमवार) को अपराह्न 2:00 बजे शासकीय महाविद्यालय सभागार, नवागढ़ में “भारत में शिक्षा एवं शिक्षा में भारतीयता” विषय पर एक भव्य राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इस संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय शिक्षा की गौरवशाली परंपरा, भारतीय ज्ञान प्रणाली, सांस्कृतिक मूल्यों, नैतिक शिक्षा तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के आलोक में शिक्षा के भारतीय स्वरूप पर गंभीर एवं सार्थक विमर्श करना है। आयोजन समिति के अनुसार वर्तमान समय में जब शिक्षा व्यवस्था वैश्विक परिवर्तन, तकनीकी नवाचार तथा बदलती सामाजिक आवश्यकताओं के दौर से गुजर रही है, तब भारतीय शिक्षा की मूल आत्मा, उसके सांस्कृतिक आधार और मूल्यपरक दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गया है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं तथा सामाजिक चिंतकों को एक मंच पर आमंत्रित किया गया है, ताकि शिक्षा में भारतीयता के समावेश पर व्यापक चर्चा हो सके।

 

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ समाजसेवी प्रकाश केसरवानी उपस्थित रहेंगे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता शासकीय महाविद्यालय नवागढ़ के प्राचार्य प्रो. बी. के. पटेल करेंगे। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता के रूप में शिक्षा संस्कृति उद्यान न्यास, छत्तीसगढ़ के प्रांत सहसंयोजक श्री हरिराम जायसवाल भारतीय शिक्षा दर्शन, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद तथा शिक्षा में भारतीय मूल्यों की आवश्यकता पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में जे. पी. वर्मा स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बिलासपुर के प्राचार्य डॉ. श्याम लाल निराला, शासकीय शबरीमाता कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बिलासपुर के पूर्व प्राचार्य डॉ. कीर्ति कुमार भंडारी तथा शिक्षा संस्कृति उद्यान न्यास, बलौदा बाजार के जिला संयोजक के. आर. केवर्त भी अपने विचार रखेंगे। आयोजन समिति का मानना है कि इन विद्वानों का मार्गदर्शन शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।

संगोष्ठी के दौरान “भारत में शिक्षा एवं शिक्षा में भारतीयता” विषय को अनेक आयामों से समझने का प्रयास किया जाएगा। इसमें भारतीय शिक्षा प्रणाली की ऐतिहासिक यात्रा, गुरुकुल परंपरा, भारतीय ज्ञान परंपरा, वेद, उपनिषद, दर्शन, आयुर्वेद, योग, गणित, विज्ञान एवं साहित्य की समृद्ध विरासत के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में भारतीय जीवन मूल्यों के समावेश पर विस्तृत चर्चा होगी। विद्वान इस बात पर भी अपने विचार रखेंगे कि किस प्रकार शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम न होकर चरित्र निर्माण, सामाजिक उत्तरदायित्व, नैतिकता, राष्ट्रभक्ति, पर्यावरण संरक्षण तथा मानवीय संवेदनाओं के विकास का सशक्त साधन बन सकती है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भारतीय भाषाओं, मातृभाषा आधारित शिक्षण, कौशल विकास, अनुभवात्मक शिक्षा, भारतीय ज्ञान प्रणाली तथा मूल्यपरक शिक्षा को दिए गए महत्व पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा।

संगोष्ठी में विशेष रूप से “भारत में शिक्षा एवं शिक्षा में भारतीयता: परंपरा, मूल्य और समकालीन परिप्रेक्ष्य का अध्ययन”, “भारतीय शिक्षा प्रणाली में भारतीयता: दर्शन, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना”, “भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों एवं राष्ट्रनिर्माण में शिक्षा की भूमिका”, “भारतीयता के परिप्रेक्ष्य में शिक्षा: परंपरा, आधुनिकता और समकालीन चुनौतियाँ”, “राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के आलोक में भारतीय शिक्षा में भारतीयता का समावेश”, “गुरुकुल से आधुनिक शिक्षा तक भारतीय शिक्षा की सतत विकास यात्रा”, “भारतीय शिक्षा की आत्मा: भारतीयता, मूल्यपरक शिक्षा और नवाचार” तथा “आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भारतीय शिक्षा एवं सांस्कृतिक चेतना की भूमिका” जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार प्रस्तुत किए जाएंगे। विद्वानों का मानना है कि शिक्षा में भारतीयता का अर्थ केवल अतीत का गौरवगान नहीं, बल्कि भारतीय चिंतन, वैज्ञानिक दृष्टि, सांस्कृतिक विविधता, सामाजिक समरसता, संवैधानिक मूल्यों तथा आधुनिक नवाचारों के संतुलित समन्वय से है। इसी दृष्टिकोण को समाज के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना इस संगोष्ठी का प्रमुख उद्देश्य रहेगा।

आयोजन समिति के अनुसार यह संगोष्ठी केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं होगी, बल्कि भारतीय शिक्षा के भविष्य को लेकर एक गंभीर बौद्धिक विमर्श का मंच बनेगी। वर्तमान समय में शिक्षा के व्यावसायीकरण, नैतिक मूल्यों में गिरावट, सांस्कृतिक पहचान के क्षरण तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों के बीच भारतीय शिक्षा दर्शन की प्रासंगिकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। ऐसे समय में यह आवश्यक है कि शिक्षा विद्यार्थियों को केवल ज्ञान और कौशल ही न प्रदान करे, बल्कि उनमें कर्तव्यबोध, सामाजिक संवेदनशीलता, आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता, राष्ट्रीय एकता तथा विश्वबंधुत्व की भावना भी विकसित करे। संगोष्ठी में इस बात पर भी विचार किया जाएगा कि किस प्रकार भारतीय ज्ञान परंपरा के वैज्ञानिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक पक्षों को आधुनिक शिक्षा एवं अनुसंधान से जोड़कर नई पीढ़ी के लिए उपयोगी बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम के आयोजक एवं शिक्षा संस्कृति उद्यान न्यास, जांजगीर-चांपा के जिला संयोजक मनोज कुमार तिवारी ने जिले के सभी प्राचार्यों, प्राध्यापकों, शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा प्रबुद्ध नागरिकों से संगोष्ठी में अधिकाधिक संख्या में सहभागिता करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के भारतीय स्वरूप पर होने वाला यह विचार-मंथन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने, भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्जागरण तथा राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की भूमिका को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संगोष्ठी से प्राप्त निष्कर्ष भविष्य में शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक दिशा प्रदान करेंगे तथा समाज में भारतीयता आधारित मूल्यपरक शिक्षा के प्रसार को नई गति मिलेगी। शिक्षा संस्कृति उद्यान न्यास द्वारा आयोजित यह स्थापना दिवस समारोह शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित सभी लोगों के लिए एक प्रेरणादायी अवसर होगा तथा भारतीय शिक्षा की समृद्ध परंपरा को आधुनिक संदर्भों में समझने और आगे बढ़ाने की दिशा में सार्थक योगदान देगा।

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