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झूठे दावे कर 17 गुना बढ़ाया शेयर का दाम, 24 करोड़ का मुनाफा कमा निकल लिए प्रमोटर

शेयर बाजार में सेबी ने पंप एंड डंप का एक मामला पकड़ा है. विकास प्रोपपंत एंड ग्रेनाइट (Vikas Proppant and Granite) कंपनी के प्रमोटर्स ने एक ऐसी जमीन के जरिए पूरा खेल रचा जो उनके पास थी ही नहीं. यही नहीं इन लोगों ने कंपनी के बिजनेस के बारे में भी झूठे दावे किए. इसका परिणाम यह हुआ कि कंपनी का शेयर एक साल में ही 1.02 रुपये से उछलकर 17.85 रुपये पर पहुंच गए. इसके बाद प्रमोटर्स ने अपने शेयर बेच दिए. स्‍टॉक का रेट गिर गया और बाकी निवेशक ठगे रह गए. अब सेबी ने प्रमोटर्स से इस पूरे खेल के जरिए कमाए गए पैसे ब्‍याज सहित लौटाने का आदेश दिया है. विकास प्रोपपंत एंड ग्रेनाइट (Vikas Proppant and Granite) का शेयर कल बीएसई पर 0.59 रुपये पर कारोबार कर रहा था.

सेबी की जांच में सामने आया कि प्रमोटर्स बजरंग दास अग्रवाल (अब मृत), बजरंग दास अग्रवाल की पत्नी और कंपनी की एमडी बिमला देवी जिंदल, उनकी बेटी और कंपनी की एग्जिक्‍यूटिव डायरेक्टर कामिनी जिंदल और उनके सहयोगियों ने करीब 8 करोड़ शेयर बेचे. इससे उन्हें करीब 24 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ. बजरंग दास अग्रवाल नेशनल यूनियनिस्ट जमींदार पार्टी के फाउंडर भी थे. कामिनी जिंदल राजस्थान के गंगानगर क्षेत्र से इस पार्टी के टिकट पर विधायक चुनी जा चुकी है.

ऐसे रचा खेल
विकास प्रोपपंत एंड ग्रेनाइट (Vikas Proppant and Granite) के प्रमोटर्स और एसोसिएट्स ने इस पूरे खेल को एक जमीन के जरिए रचा. इस जमीन के लीज राइट्स पर प्रमोटर्स को कंपनी ने प्रिफरेंस शेयर जारी किए. कंपनी ने चार लोगों, प्रमोटर्स कामिनी जिंदल और बिमला देवी जिंदल और नॉन-प्रमोटर्स कांता देवी और उनकी बेटी कोमल को 32.5 करोड़ फुल्ली पेड इक्विटी शेयर प्रिफरेंशियल बेसिस पर जारी किए. इन शेयरों को लेकर रिकॉर्ड में डाला गया कि इन्हें जमीन पर लीज राइट्स के बदले ये शेयर जारी किए गए हैं. यह जमीन राजस्थान के जोधपुर की तहसील बिलारा के गांव कपरड़ा में बताई गई और लीज डीड के मुताबिक इसकी वैल्यू 81.25 करोड़ रुपये थी. जबकि हकीकत यह है कि यह जमीन उनके नाम पर थी ही नहीं

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